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Facebook Par ugla huaa padhe - Charchamanch me

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मंगलवार, 29 नवंबर 2011

Ravi jain on facebook

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थॉमस रो ने सबसे पहले सूरत के एक महल नुमा घर को लूटा जो आज भी मौजूद है। फिर पड़ोस के गाँव में और फिर और आगे। खाली हाथ आये इन अंग्रजों के पास जब करोड़ों की संपत्ति आई तो इन्होने अपनी खुद की सेना बनायी। उसके बाद सन १७५७ में रोबर्ट क्लाइव बंगाल के रास्ते भारत आया उस समय बंगाल का राजा सिराजुद्योला था। उसने अंग्रेजों से संधि करने से मना कर दिया तो रोबर्ट क्लाइव ने युद्ध की धमकी दी और केवल ३५० अंग्रेज सैनिकों के साथ युद्ध के लिये गया। बदले में सिराजुद्योला ने १८००० की सेना भेजी और सेनापति बनाया मीर जाफर को। तब रोबर्ट क्लाइव ने मीर जाफर को पत्र भेज कर उसे बंगाल की राज गद्दी का लालच देकर उससे संधि कर ली। रोबर्ट क्लाइव ने अपनी डायरी में लिखा था कि बंगाल की राजधानी जाते हुए मै और मीर जाफर सबसे आगे, हमारे पीछे मेरी ३५० की अंग्रेज सेना और उनके पीछे बंगाल की १८००० की सेना। और रास्‍ते में जितने भी भारतीय हमें मिले उन्होंने हमारा कोई विरोध नहीं किया, उस समय यदि सभी भारतीयों ने मिल कर हमारा विरोध किया होता या हम पर पत्थर फैंके होते तो शायद हम कभी भारत में अपना साम्राज्य नहीं बना पाते। वो डायरी आज भी इंग्लैण्ड में है। मीर जाफर को राजा बनवाने के बाद धोखे से उसे मार कर मीर कासिम को राजा बनाया और फिर उसे मरवाकर खुद बंगाल का राजा बना। ६ साल लूटने के बाद उसका स्थानातरण इंग्लैण्ड हुआ और वहां जा कर जब उससे पूछा गया कि कितना माल लाये हो तो उसने कहा कि मै सोने के सिक्के, चांदी के सिक्के और बेश कीमती हीरे जवाहरात लाया हूँ। मैंने उन्हें गिना तो नहीं किन्तु इन्हें भारत से इंग्लैण्ड लाने के लिये मुझे ९०० पानी के जहाज़ किराये पर लेने पड़े। अब सोचो एक अकेला रोबर्ट क्लाइव ने इतना लूटा तो भारत में उसके जैसे ८४ ब्रीटिश अधीकारी आये जिन्होंने भारत को लूटा। रोबर्ट क्लाइव के बाद वॉरेन हेस्टिंग्स नामक अंग्रेज अधीकारी आया उसने भी लूटा, उसके बाद विलियम पिट, उसके बाद कर्जन, लौरेंस, विलियम मेल्टिन और न जाने कौन कौन से लुटेरों ने लूटा। और इन सभी ने अपने अपने वाक्यों में भारत की जो व्याख्या की उनमे एक बात सबमे सामान है। सबने अपने अपने शब्दों में कहा कि भारत सोने की चिड़िया नहीं सोने का महासागर है। इनका लूटने का प्रारम्भिक तरीका यह था कि ये किसी धनवान व्यक्ति को एक चिट्ठी भेजते थे जिसमे एक करोड़, दो करोड़ या पांच करोड़ स्वर्ण मुद्राओं की मांग करते थे और न देने पर घर में घुस कर लूटने की धमकी देते थे। ऐसे में एक भारतीय सोचता कि अभी नहीं दिया तो घर से दस गुना लूट के ले जाएगा अत: वे उनकी मांग पूरी करते गए। धनवानों के बाद बारी आई देश के अन्य राज्यों के राजाओं की। वे अन्य राज परीवारों को भी ऐसे ही पत्र भेजते थे। कूछ राज परिवार जो कायर थे उनकी मांग मान लेते थे किन्तु कूछ साहसी लोग ऐसे भी थे जो उन्हें युद्ध के लिये ललकारते थे। फिर अंग्रेजों ने राजाओं से संधि करना शुरू कर दिया।
अंग्रेजों ने भारत के एक भी राज्य पर शासन खुद युद्ध जीत कर नहीं जमाया। महारानी झांसी के विरुद्ध १७ युद्ध लड़ने के बाद भी उन्हें हार का मूंह देखना पड़ा। हैदर अली से ५ युद्धों में अंग्रेजों ने हार ही देखी। किन्तु अपने ही देश के कूछ कायरों ने लालच में आकर अंग्रेजों का साथ दिया और अपने बंधुओं पर शस्त्र उठाया।
सन १८३४ में अंग्रेज अधिकारी मैकॉले का भारत में आगमन हुआ। उसने अपनी डायरी में लिखा है कि ”भारत भ्रमण करते हुए मैंने भारत में एक भी भिखारी और एक भी चोर नहीं देखा। क्यों कि भारत के लोग आज भी इतने अमीर हैं कि उन्हें भीख मांगने और चोरी करने की जरूरत नहीं है और ये भारत वासी आज भी अपना घर खुला छोड़ कर कहीं भी चले जाते हैं इन्हें तालों की भी जरूरत नहीं है।” तब उसने इंग्लैण्ड जा कर कहा कि भार त को तो हम लूट ही रहे हैं किन्तु अब हमें कानूनन भारत को लूटने की नीति बनानी होगी और फिर मैकॉले के सुझाव पर भारत में टैक्स सिस्टम अंग्रेजों द्वारा लगाया गया। सबसे पहले उत्पादन पर ३५०%, फिर उसे बेचने पर ९०% । और जब और कूछ नहीं बचा तो मुनाफे पर भी टैक्स लगाया गया। इस प्रकार अंग्रजों ने भारत पर २३ प्रकार के टैक्स लगाए।
और इसी लूट मार से परेशान भारतीयों ने पहली बार एकत्र होकर सब १८५७ में अंग्रेजों के विरुद्ध क्रांति छेड़ दी। इस क्रांती की शुरुआत करने वाले सबसे पहले वीर मंगल पाण्डे थे और अंग्रेजों से भारत की स्वतंत्रता के लिये शहीद होने वाले सबसे पहले शहीद भी मंगल पांडे ही थे। देखते ही देखते इस क्रान्ति ने एक विशाल रूप धारण किया। और इस समय भारत में करीब ३ लाख २५ हज़ार अंग्रेज़ थे जिनमे से ९०% इस क्रांति में मारे गए। किन्तु इस बार भी कूछ कायरों ने ही इस क्रान्ति को विफल किया और अंग्रेजों द्वारा सहायता मांगने पर उन्होंने फिर से अपने बंधुओं पर प्रहार किया।
उसके बाद १८७० में अंग्रेजों के विरुद्ध क्रान्ति छेड़ी हमारे देश के गौरव स्वामी दयानंद सरस्वती ने, उनके बाद लोकमान्य तिलक, लाला लाजपतराय, वीर सावरकर जैसे वीरों ने। फिर गांधी जी, भगत सिंह, उधम सिंह, चंद्रशेखर जैसे बीरों ने। अंतिम लड़ाई लड़ने वालों में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस रहे हैं। सन १९३९ में द्वितीय विश्व युद्ध के समय जब हिटलर इंग्लैण्ड को मारने के लिये तैयार खड़ा था तो अंग्रेज साकार ने भारत से एक हज़ार ७३२ करोड़ रुपये ले जा कर युद्ध लड़ने का निश्चय किया और भारत वासियों को वचन दिया कि युद्ध के बाद भारत को आज़ाद कर दिया जाएगा और यह राशि भारत को लौटा दी जाएगी। किन्तु अंग्रेज अपने वचन से मुकर गए।
आज़ादी मिलने से कूछ समय पहले एक बीबीसी पत्रकार ने गांधी जी से पूछा कि अब तो अंग्रेज जाने वाले हैं, आज़ादी आने वाली है, अब आप पहला काम क्या करेंगे? तो गांधी जी ने कहा कि केवल अंग्रेजों के जाने से आज़ादी नहीं आएगी, आज़ादी तो तब आएगी जब अंग्रेजो द्वारा बनाया गया पूरा सिस्टम हम बदल देंगे अर्थात उनके द्वारा बनाया गया एक एक कानून बदलने की आवश्यकता है क्यों कि ये क़ानून अंग्रेजों ने भारत को लूटने के लिये बनाए थे, किन्तु अब भारत के आज़ाद होने के बाद इन सभी व्यर्थ के कानूनों को हटाना होगा और एक नया संविधान भारत के लिये बनाना होगा। हमें हमारी शिक्षा पद्धति को बदलना होगा जो कि अंग्रेजों ने भारत को गुलाम बनाए रखने के लिये बनाई थी। जिसमे हमें हमारा इतिहास भुला कर अंग्रेजों का कथित महान इतिहास पढ़ाया जा रहा है। अंग्रेजों कि शिक्षा पद्धति में अंग्रजों को महान और भारत को नीचा और गरीब देश बता कर भारत वासियों को हीन भावना से ग्रसित किया जा रहा है। इस सब को बदलना होगा तभी सही अर्थों में आजादी आएगी।
किन्तु आज भी अंग्रेजों के बनाए सभी क़ानून यथावत चल रहे हैं अंग्रेजों की चिकित्सा पद्धति यथावत चल रही है। और कूछ काम तो हमारे देश के नेताओं ने अंग्रेजों से भी बढ़कर किये। अंग्रेजों ने भारत को लूटने के लिये २३ प्रकार के टैक्स लगाए किन्तु इन काले अंग्रेजों ने ६४ प्रकार के टैक्स हम भारत वासियों पर थोप दिए। और इसी टैक्स को बचाने के लिये देश के लोगों ने टैक्स की चोरी शुरू की जिससे काला बाजारी जैसी समस्या सामने आई। मंत्रियों ने इतने घोटाले किये कि देश की जनता भूखी मरने लगी। भारत की आज़ादी के बाद जब पहली बार संसद बैठी और चर्चा चल रही थी राष्ट्र निर्माण की तो कई सांसदों ने नेहरु से कहा कि वह इंग्लैण्ड से वह उधार की राशी मांगे जो द्वितीय विश्व युद्ध के समय अंग्रेजों ने भारत से उधार के तौर पर ली थी और उसे राष्ट्र निर्माण में लगाए। किन्तु नेहरु ने कहा कि अब वह राशि भूल जाओ। तब सांसदों का कहना था कि इन्होने जो २०० साल तक हम पर जो अत्याचार किया है क्या उसे भी भूल जाना चाहिए? तब नेहरु ने कहा कि हाँ भूलना पड़ेगा, क्यों कि अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में सब कूछ भुलाना पड़ता है। और तब यही से शुरुआत हुई सता की लड़ाई की और राष्ट्र निर्माण तो बहुत पीछे छूट गया था।
तो मित्रों अब मुझे समझ आया कि भारत इतना गरीब कैसे हुआ, किन्तु एक प्रश्न अभी भी सामने है कि स्वीटजरलैंड जैसा देश आज इतना अमीर कैसे है जो आज भी किसी भी प्रकार का कार्य न करने पर भी मज़े कर रहा है। तो मित्रों यहाँ आप जानते होंगे कि स्वीटजरलैंड में स्विस बैंक नामक संस्था है, केवल यही एक काम है जो स्वीटजरलैंड को सबसे अमीर देश बनाए बैठा है। स्विस बैंक एक ऐसा बैंक है जो किसी भी व्यक्ति का कित ना भी पैसा कभी भी किसी भी समय जमा कर लेता है। रात के दो बजे भी यहाँ काम चलता मिलेगा। आपसे पूछा भी नहीं जाएगा कि यह पैसा आपके पास कहाँ से आया? और उसपर आपको एक रुपये का भी ब्याज नहीं मिलेगा। और ये बैंक आपसे पैसा लेकर भारी ब्याज पर लोगों को क़र्ज़ देता है। खाताधारी यदि अपना पैसा निकालने से पहले यदि मर जाए तो उस पैसा का मालिक स्विस बैंक होगा, क्यों कि यहाँ उत्तराधिकार जैसी कोई परम्परा नहीं है। और स्वीटजरलैंड अकेला नहीं है, ऐसे ७० देश और हैं जहाँ काला धन जमा होता है इनमे पनामा और टोबैको जैसे देश हैं।

Rohit singh on facebook

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चिड़ियाधर मे काँनवेन्ट स्कूल के बच्चे--oh! wow monkey is sleeping, don't disturb.
सरकारी स्कूल के बच्चे--हऊ देख बनरा सुत्तल बा,मार ढेला सारे के, लिहो लिहो लिहो लिहो--

Arun arora on facebook

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दिल्ली मे एक
महिला आई
ट्रेन मे उसने
बुक करवाई
चीजे ये थी
गिनी गिनाइ
तसवीर
टोकरी
डिब्बा पीला
पिल्ला सुन्दर और सजीला"

ट्रेन आई जब
प्लेटफ़ार्म पर
लाये कुली
सामान लादकर
तसवीर
टोकरी
डिब्बा पीला
पिल्ला सुन्दर और सजीला

हुई लादने की तैयारी
लिस्ट मे थी ये चीजे सारी
तसवीर
टोकरी
डिब्बा पीला
पिल्ला
सुन्दर और सजीला

इंजन ने सीटी
बजाकर
चलने का
संकेत दिया जब
पिल्ला बाहर
कूद गया तब

ट्रेन पहुची मुंबई जब
मिला नही सामान वहा सब
तसवीर
टोकरी
डिब्बा पीला
लेकिन जाने
कहा चला गया
पिल्ला सुन्दर और सजीला..?

फ़िर तो सबने
ढूढा उसको
आया ना था
मिलता किसको
तसवीर
टोकरी
डिब्बा पीला
लेकिन जाने
कहा चला गया
पिल्ला सुन्दर और सजीला

कुलियो ने फ़िर
ढूढ मचाई
उनको वहा इक
पडा दिखाई
कुत्ता बडा और झबरीला
कुत्ता बडा पकड
कर लाये
जहा पडा
सामान वो आये
तसवीर
टोकरी
डिब्बा पीला
लेकिन जाने
कहा चला गया
पिल्ला सुन्दर और सजीला

महिला तभी
वहा पर आई
बिल्टी उसने
जब छुडवाई
लोगो ने सामान थमाया
लेकिन उसने क्या है पाया
तसवीर
टोकरी
डिब्बा पीला
कुत्ता बडा और झबरीला...?

लाऒ मेरा पिल्ला लाओ
वो चिल्लाई
वो चिल्लाई
मैडम जरा हमारी सुनिये
जो कहते है उसको गुनिये
इतने लंबे अरसे मे
पिल्ला बढ भी तो सकता है
कुत्ता भी तो बन सकता है
चीजे जो थी हमने पाई
वही आपको है गिनवाई
तसवीर
टोकरी
डिब्बा पीला
कुत्ता बडा और झबरीला'

Surender singh bhaduria on facebook

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हौसला है तो जिंदगी है.यदि हौसला नही तो जिंदगी नर्क है..----
ऐ जिंदगी अभी तेरा इम्तहान बाकी है, मेरे हौसलों को उड़ान मिलना अभी बाकी है।..
Harishankar Pandey के चित्र
ऐ जिंदगी अभी तेरा इम्तहान बाकी है, मेरे हौसलों को उड़ान मिलना अभी बाकी है।
नापी है अभी तो मुट्ठी भर जमीन, आसमान में परिंदों की उड़ान अभी बाकी है। इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल सलेक्शन [आईबीपीएस] की परीक्षा देने फतेहाबाद से हिसार आया विकलांग हवा सिंह अपने हाथों के बल पर चल कर परीक्षा केंद्र जाते हुए।
द्वारा: Harishankar Pandey

Navneet Pandey on facebook

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मित्रों! एक शुभारंभ लिखने-पढने और लिखे-पढे को जांचनेवालों के लिए। हम सब जानते हैं.. लिखा बहुत और बहुत जा रहा है, लेखक-लेखन भी बहुत सरल-सुलभ होता जा रहा हैं लेकिन विडंबना के साथ इसका एक बहुत बड़ा दूसरा पहलू और प्रश्न कि पढा कितना और क्या जा रहा है? पाठकनामा यही जानने और जानकारी देने का प्रयास है जिसमें हम आप सभी के सहयोग और सहभागिता से लेखक और पाठक के बीच एक संवाद स्थापित करने का उपक्रम करने का सद्प्रयास करेंगे। पाठकनामा में लेखक , प्रकाशक अपनी कृति के बारे में तथा आलोचक, पाठक अपनी पढी किसी लेखक की कृति के बारे में अपने विचार, समीक्षा, आलोचना यहां साझा कर सकता है। कृति की समीक्षा, आलोचना, पाठकीय टीप्पणी मय कृति कवर,प्रकाशन विवरण पाठकनामा में भेजी जा सकती है या समीक्षा, आलोचना के लिए लेखक, प्रकाशक अपने प्रकाशन भी दो प्रतियां पाठकनामा को भी भेजी जा सकती है। पाठकनामा केवल एक निरपेक्ष मार्ग है पाठक को किताब तक पहुंचाने और पढने के लिए प्रेरित करने का। इस संदर्भ में और सार्थक महत्त्वपूर्ण सुझाव आमंत्रित है.. अपनी पुस्तक के कवर की फ़ोटो, की गयी आलोचना-समीक्षा आप editor.pathhaknama@gmail.com को भेज सकते हैं ।

Gautam Gautam on facebook

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भ्रम टूटा - खुशवन्त सिंह

कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनको बिना समझे ही हम घृणा करने लगते हैं। इस प्रकार के लोगों में गुरु गोलवलकर मेरी सूची में सर्वप्रथम थे। सांप्रदायिक दंगों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की करतूतें, महात्मा गांधी की हत्या, भारत को धर्मनिरपेक्ष से हिन्दू राज्य बनाने के प्रयास आदि अनेक बातें थीं, जो मैंने सुन रखी थीं। फिर भी एक पत्रकार के नाते उनसे मिलने का मोह मैं टाल नहीं सका।

मेरी कल्पना थी कि उनसे मिलते समय मुझे गणवेशधारी स्वयंसेवकों के घेरे में से गुजरना होगा, किन्तु ऐसा नहीं हुआ। इतना ही नहीं, मेरी समझ थी मेरी कार का नम्बर नोट करने वाला कोई मुफ्ती गुप्तचर भी वहाँ होगा, पर ऐसा भी कुछ नहीं था। जहां वे रुके थे, वह किसी मध्यम श्रेणी के परिवार का कमरा था। बाहर जूतों-चप्पलों की कतार लगी थी। वातावरण में व्याप्त अगरबत्ती की सुगंध से ऐसा लगता था, मानो कमरे में पूजा हो रही हो। भीतर के कमरों में महिलाओं की हलचलें हो रही थीं। बर्तनो और कप-सासरों की आवाज आ रही थी। मैं कमरे में पहुँचा। महाराष्ट्रीय ब्राह्मणों की पध्दति के अनुसार शुभ्र-धावल धोती-कुरते पहने 10-12 व्यक्ति वहाँ बैठे थे।

65 के लगभग आयु, इकहरी देह, कंधों पर झूलती काली-घुंघराली केशराशि, मुखमुद्रा को आवृत करती उनकी मूँछें, विरल भूरी दाढ़ी, कभी लुप्त न होने वाली मुस्कान और चश्मे के भीतर से झांकते उनके काले चमकीले नेत्र। मुझे लगा कि वे भारतीय होची-मिन्ह ही हैं। उनकी छाती के कर्करोग पर अभी-अभी शल्यक्रिया हुई है, फिर भी वे पूर्ण स्वस्थ एवं प्रसन्नचित दिखाई दे रहे हैं।

गुरु होने के कारण शिष्यवत् चरणस्पर्श की वे मुझसे अपेक्षा करते हों, इस मान्यता से मैं झुका, परंतु उन्होंने मुझे वैसा करने का अवसर ही नहीं दिया। उन्होंने मेरे हाथ पकड़े, मुझे खींचकर अपने निकट बिठा लिया और कहा - 'आपसे मिलकर बड़ी प्रसन्नता हुई। बहुत दिनों से आपसे मिलने की इच्छा थी।' उनकी हिन्दी बड़ी शुध्द थी।

'मुझे भी! खासकर, जबसे मैंने आपका 'बंच आफ लेटर्स' पढ़ा', कुछ संकुचाते हुए मैंने कहा।

'बंच आफ थॉट्स' कहकर उन्होंने मेरी भूल सुधारी, किन्तु उस ग्रंथ पर मेरी राय जानने की उन्होंने कोई इच्छा व्यक्त नहीं की। मेरी एक हथेली को अपने हाथों में लेकर उसे सहलाते हुए वे मुझसे बोले - 'कहिए।'

मैं समझ नहीं पा रहा था कि प्रारंभ कहाँ से करूँ। मैंने कहा - 'सुना है, आप समाचार-पत्रीय प्रसिध्दि को टालते हैं और आपका संगठन गुप्त है।'

'यह सत्य है कि हमें प्रसिध्दि की चाह नहीं, किंतु गुप्तता की कोई बात ही नहीं। जो चाहे पूछें', उन्होंने उत्तर दिया।

इसी प्रकार विभिन्न विषयों पर परस्पर खुलकर बातचीत हुई।

मैं गुरुजी का आधे घंटे का समय ले चुका था। फिर भी उनमें किसी तरह की बेचैनी के र्चिन्ह दिखाई नही दिए। मै उनसे आज्ञा लेने लगा तो उन्होने हाथ पकडकर पैर छुनेसे रोक दिया।

'क्या मैं प्रभावित हुआ? मैं स्वीकार करता हूँ कि हाँ। उन्होंने मुझे अपना दृष्टिकोण स्वीकार कराने का कोई प्रयास नहीं किया, अपितु उन्होंने मेरे भीतर यह भावना निर्माण कर दी कि किसी भी बात को समझने-समझाने के लिए उनका हृदय खुला हुआ है। नागपुर आकर वस्तुस्थिति को स्वयं समझने का उनका निमंत्रण मैंने स्वीकार कर लिया है। हो सकता है कि हिन्दू-मुस्लिम एकता को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का उद्देश्य बनाने के लिए मैं उनको मना सकूँगा और यह भी हो सकता है कि मेरी यह धारणा एक भोले-भाले सरदार जी जैसी हो।'

Ashok kumar pandey on facebook

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सबको रोटी दिला देना ही समाजवादी समाज का लक्ष्य नहीं....समाजवादी समाज का लक्ष्य है संसाधनों तथा आय और संपत्ति का समानता पूर्ण बंटवारा. एक ऎसी आर्थिक व्यवस्था जो असमानता नहीं समानता बढाती हो. वह भी ऐसे नहीं कि सब गरीब हों और सब बराबर हों...बल्कि ऐसे कि सब समृद्ध हों और सब बराबर हों.

Narender singh tomer nist on facebook

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सी.बी.आई. और साइबर अपराध प्रकोष्‍ठ
गृह राज्‍य मंत्री श्री जि‍तेन्‍द्र सिं‍ह ने आज लोक सभा में एक प्रश्‍न के लि‍खि‍त उत्‍तर में बताया कि‍भारत के संवि‍धान की सातवीं अनुसूची के तहत पुलि‍स और लोक व्‍यवस्‍था राज्‍य के वि‍षय हैं, इसलि‍ए साइबर अपराध सहि‍त अपराधों को रोकने, उनका पता लगाने, उन्‍हें दर्ज करने और उनकी जांच-पड़ताल करने तथा अपनी वि‍धि‍प्रवर्तन एजेंसि‍यों की मशीनरी के माध्‍यम से अपराधि‍यों पर अभि‍योजन चलाने की जि‍म्‍मेदारी बुनि‍यादी रूप से राज्‍य सरकारों की है। वि‍भि‍न्‍न राज्‍य सरकारों ने साइबर अपराध-प्रकोष्‍ठ स्‍थापि‍त कि‍ए हैं। केन्‍द्रीय अन्‍वेषण ब्‍यूरो (सीबीआई) में एक वि‍शेष यूनि‍ट है, जो संघ राज्‍य क्षेत्रों के क्षेत्राधि‍कार में आने वाले साइबर अपराध संबंधी मामलों से नि‍पटती है। सीबीआई द्वारा स्‍थापि‍त साइबर अपराध जांच प्रकोष्‍ठ (सीसीआईसी) साइबर अपराधों की जांच करता है और साइबर अपराध एवं साइबर धोखाधड़ी से नि‍पटने वाले कानूनों के कार्यान्‍वयन में संबंधि‍त पुलि‍स संगठनों की मदद करता है। केन्‍द्र सरकार, सीबीआई अकादमी, गाजि‍याबाद, सरदार बल्‍लभभाई पटेल राष्‍ट्रीय पुलि‍स अकादमी (एसवीपीएनपीए), हैदराबाद, राष्‍ट्रीय अपराध रि‍कार्ड ब्‍यूरो (एनसीआरबी), नई दि‍ल्‍ली, एनईपीए बारापानी, (एलएनजेएनएनआईसीएफएस), नई दि‍ल्‍ली, सीडीटीएस, चंडीगढ़ और हैदराबाद तथा जीईक्‍यूडी, हैदराबाद जैसे वि‍भि‍न्‍न प्रशि‍क्षण-संस्‍थानों में साइबर अपराध की जांच-पड़ताल के संबंध में राज्‍य सरकारों के कार्मि‍कों को नि‍यमि‍त रूप से प्रशि‍क्षण प्रदान करके उनके प्रयासों में सहायता करती है।

सोमवार, 28 नवंबर 2011

Kiran srivastva on facebook

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सुप्रभात दोस्तों !!
वातायन से झांकती हुई सुबह की स्वर्णिम किरणे आपके जीवन को भी सुनहरी आभा प्रदान करे ...... प्रजिन में घुली हुई फूलो की सुन्दर भीनी महक की तरह आपका जीवन भी अपनों के स्नेह से हमेशा सुवासित रहे ...... हरी ॐ !!!!

Renuka sharma on facebook

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What is the advantage for unmarried people?........Wo bed ke dono side so sakte hai ;-)

prity porwol on facebook

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इश्क करके भी दीवाना ना हुआ,
या तो तू नकली है या इश्क नकली... Alok Puranik

शनिवार, 26 नवंबर 2011

atul mishra on facebook

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ग़म चाहे किस कदर दो, मगर ख्याल यह रहे !
पूछें जो लोग, हँस दूँ, मेरा हाल यह रहे !!
******अतुल मिश्र

shasi agravwal

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Pumpkin Baby...


ravindara k das on facebook

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जब कोई मेरी तारीफ़ करता है, किसी भी वज़ह से.., तो लगता है ... या तो बेवकूफ़ बना रहा है या बहला फुसला रहा है... मैं अकबकाया सा रह जाता हूँ.... और आप ?

onkar singh on facebook

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A pro golfer was involved in a terrible car crash and was rushed to hospital. Just before he was put under, the surgeon popped in to see him.
"I have some good news and some bad news." says the surgeon. "The bad news is that I have to remove your right arm!"
"Oh god no!" cries the man. "My career is over! Please Doc, what's the good news?"
"The good news is, I have another one to replace it with, ...

dhanjay mishra on facebook

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ek phool bhi azeeb tha
kabhi hamare bhi bahut karib tha
jab chahne lage use khud se jyada
to pata chala uske humse bhi jyada koi or karib tha..

Renu siroya on facebook

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जीवन में अच्छी उपलब्धि हासिल करने के लिए अपने लक्ष्य को मृगतृष्णा के सामान बना लीजिये....रुकिए मत...बस..चलते रहिये कुछ पाने की प्यास में.... और मंजिल की तलाश में.....

suresh bundel on facebook

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दामादों सा कर रहे, अजमल से बर्ताव!
रोज़ गुलत्ती,बिरयानी, मेवे और पुलाव!!
मेवे और पुलाव, अभी मत देना फांसी!
चिंतित सत्ता, आ जाती जब उसको खांसी!!
देकर उसको टिकट, बना दो ना काबीना!
शूल चुभोता छाती में, अब उसका जीना!!

शुक्रवार, 25 नवंबर 2011

swapnil kumar on facebook

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इस फेसबुक पर बहुत से लोग ब्राम्हणवादी मानसिकता से भरे हुए हैं. मित्र बनाने के मामले में जो भी आता गया मैं उसे स्वीकार करता गया. लेकिन अनुभव यही कह रहा हैं. हर इंसान को आप दोस्त नही कह सकते.
मूर्ख से दोस्ती करना अपने आप में मूर्खता हैं....
कोई मेरे खिलाफ दुष्प्रचार कर रहा हैं तो उसे करने दें. ये उसके कर्म हैं. मुझे अपने चरित्र को लेकर सफाई देने की जरूरत नहीं हैं. जो लोग मेरे साथ रहे हैं. या जो लोग मुझसे मिल चुके हैं. जो जानते हैं कि मैं कैसा हूँ... जीवन में दो मूल्य मेरे लिए प्रधान रहे हैं.. पहला चरित्र और दूसरा स्वाभिमान.... बाकि ईश्वर वादी व्यक्ति हूँ....

manisha jain on facebook

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बहुत गाढे दिनों में भी..
झिर्रियों से झांकती है..
एक नन्हीं किरण..
अभिशप्त अँधेरे को ठेल देती है परे..
मेरी आँखों से पलक टूटकर गिरती है..
और मैं..
चुपके से ले लेती हूँ तुम्हारा नाम..

aradhana chatirvedi on facebook

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प्रेम में हिसाब-किताब होता ही है. इस बात का कि जितना हम उन्हें चाहें, उतना ही वो भी...अगर ये ना हो तो प्रेम भक्ति ना बन जाय.

narendar singh tomar on facebook

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क्या क्या कैसे कैसे अजीबोगरीब पागल और बेवकूफ भरे पड़े हैं इस फेसबुक पर .. बात चल रही है खेत की और गधऊ हल हांक रहे हैं खलिहान में ... हम माल खरीदते हैं परचूनिये की दूकान से, सब्जी खरीदते हैं सब्जी वाले की दूकान से ... गधा कह रहा है कि परचूनिये ने जो माल दबाया, जो मुनाफा खोरी खाई , जो ब्लैक मार्केटिंग की , जो दो नंबर की काली कमाई से राजनीतिक दलों को चंदा दिया उसकी वजह से मँहगाई नहीं बढ़ी बल्कि विदेश...

rajneesh k jha on facebook

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वालमार्ट के माध्यम से एक बेहतरी जो सिर्फ किसानों के लिए होगी कि किसानों को सही और वाजिब कीमत मिलेगी. जो आलू किसान दो रूपये किलो बेचता है आम लोगों को २० रूपये मिलता है. कम से कम मीडिया जिसमें शायद पढ़े लिखे और बाजार के जानकार लोग हैं से नेता कि तरह आंय बांय सांय ना ही कहें. बेतरतीब लगता है :-)

दलालों के लिए बुरी खबर हो सकती है और दलालों के दलाल इस पर हल्ला मचा रहे हैं तो ये दलाली का हल्ला भी जायज ही है, सवाल दलाली का है.

swami vedantanand

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आपके सारे मित्रो को मेरा ढेर सारा प्रेम और शुभ आशीष ,यदि वह चाहे तो मेरी प्रेम की मित्र मालिका के सुमन बनकर मेरी प्रेम बाटिका को सौरभित कर सकते है ,मै अपने ह्रदय की असीम गह्रईयो से उनको पुकारता हूँ ,उनका आब्हान करता हूँ ,मेरे प्रेम की यह पुकार आपके ह्रदयो को मेरी ओर अबश्य मोड़ेगी ,और मेरा पबित्र प्रेम आपको सुख ,आनंद ,तनाब मुक्त ,संतुलित ,श्रेष्ठ जीबन देगा ,कृपया प्रेम दीप से प्रेम दीप जलाये मेरा यह प्रेम निमन्त्रण|

स्वामी सच्चिदानंद परमहंस

Lots of love and blessings to your all friends, and hearty invitations to all of them, please be my most beautiful flowers in my garden of divine love I want to welcome you all in my heart, I have for you the most precious gifts peace, pleasure, love divine light, way of living with joyful, balance life, Tension less life ,best living and journey towards enlightenment, at least you feel very good to join me, please send this invitation to your all friend and make a chain of messages.

Swami Sachhidanand Paramahansa


गुरुवार, 24 नवंबर 2011

Aroona Singh

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थप्पड़ इन लोगो को मारना चाहिए जो लोग हमरे राष्ट्र ध्वज का अपमान कर रहे . अपनों को थपड मारने से कुछ हासिल नहीं होनेवाला . बल्कि विश्व में जो ताकते देश को कमजोर देखना चाहती हैं . वो अब खुश हो रही होंगी . अब एन .जी ओ . को मिलनेवाले विदेशी फंड से देश में अफरा तफरी का माहोल बनाया जा रहा है .

Sushil Gangwar

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yaar ye samjh me nahi ata hai ek thaapad se puri sarkar hi gayee jab logo par khule aam lathi bajvate ho to pura world hil jana chahiye Baat kuchh hajam nahi huee bhai ?

Randhir Singh Panipatiya

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कांग्रेस सरकार इस देश को दोवारा विदेशियों के हाथ गुलाम कराने में जुटी हुई है इसलिए उन्होंने वाल मार्ट जैसी विदेशी कम्पनियों को भारत में अपना व्यापर करने और देश के हर कोने में अपने शोरूम खोलने की इजाजत दे दी है | जबकि कांग्रेस सरकार की सहयोगी सरकारों ने भी इसके लिए इंकार कर दिया है लकिन पता नहीं सोनिया गाँधी जी की या मंशा है इन विदेशी कम्पनियों को बढ़ावा देने में लगी हुई है |

मेरे प्यारे देशवासियों अगर आप इस देश को इन विदेशियों से बचाना चाहते है तो इसे इतना फोरवर्ड करो की देश में हर व्यक्ति विदेशी कम्पनियों का विरोध करे |..

Randhir Singh Panipatiya

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‎"नेताओं को थप्पड़ मारना लोकतान्त्रिक तरीका नहीं है।" 

मेरे भैया जब लोकतांत्रिक तरीकों से प्रोटेस्ट किया जाता है तो आधी रात को लठियाँ बरसाते हो। 

उधर युवराज राहुल यु .पी .में लोगों को पूछते फिर रहे हैं : क्यूँ भाई, गुस्सा नहीं आता आप लोगों को?

एक पन्द्रह साल के युवा ने कहा :आता है भाई हमें भी, जरा सिक्यूरिटी हटा कर घूम के दिखाओ।

Simran Kumari

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जो बोले सो निहाल..... सत श्री काल..... :) 

पवार को मारा चांटा..... युवक ने या महंगाई ने ????

Sairam S Nair

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indriyani paranyahurindriyebhyah param manah
manasastu para buddhiriyo buddheh paratastu sah
evam buddheh param buddhva samstabhyatmanamatmana
jahi satrummahabaho kamarupam durasadam
Lord Sri Krsna said : Arjuna, the senses are said to be greater than the body; but greater than the senses is the mind. Greater than the mind is the intellect; and what is greater than the intellect is He (the Self).
Thus, Arjuna, knowing that which is higher than the intellect and subduing the mind by reason, kill this enemy in the form of desire that is hard to overcome.
(Bhagavadgita, ch-3, text.-42 and 43).
-----------------------------------"JAI SHRIKRISHNA"--------------------------------

Sd Sharma Journalist

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Sd Sharma Journalist
Every part of India belongs to every Indian: Rahul Gandhi

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