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शनिवार, 5 अक्तूबर 2013

sunita bhaskar on facebook

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छुटपन में जन्माष्टमी का व्रत घर के बड़ों की देखा देखि शौकिया रख लिया करती थी.सयानी हुई तो सुदूर स्कूल से जंगल में ग्वाले जाने तक तमाम तरह के डर लगा करते थे सो बजरंग बलि का व्रत करने लगी साथ में गले में हनुमान जी का एक लोकेट भी .फिर जब हाईस्कूल में पहुंची तो उन दिनों गायत्री परिवार का खूब बोलबाला था घर में पिताजी भी सुबह शाम गायत्री माला का जाप करते थे,दसवीं में पास हो जाने की छुपी हुई मंशा से ही शायद में भी सुबह शाम योग के अंदाज में ॐ भू भुर्वाह स्वः.के स्वर में एक सौ आठ दानों की माला जपने लगी... बारहवीं का स्कूल सरयू में मिलने वाली उफान की दो बड़ी नदियों व बाघ के घने जंगल की खडी चढ़ाई को पार कर और फिर चार किमी की लम्बी हाईवे सड़क को पार कर आता था, लिहाजा बाघ के निवाले से बचने को माँ दुर्गा का व्रत शुरू कर दिया. साल के दोनों नवरात्र देवी माँ को न्यौछावर कर दिए.असौज की कड़ी धूप में पहाड़ी ककड़ी व पानी के सहारे सारा दिन खेत में घास काटते हुए भी एक बार भी कमजोर न पड़ी.क्यूंकि भीतर आस्था की एक अदृश्य शक्ति जो प्रवाहमान थी..या देवी सर्वभूतेषु से लेकर हर पाठ माँ का कंठस्थ था..
अब घर से दूर अल्मोड़ा कालेज जाने के दिन आ गये..महीने दो महीने में जब घर आती तो पिताजी को रामायण, रामचरितमानस खोले देखती, वह श्लोक पढ़ उसका वर्णन सुनाया करते...पर बहुत कम इसे सुन पायी.पिताजी छोड़ के चले गए.रामायण अधूरी रह गयी..शायद जिंदगी नयी करवट ले रही थी..कालेज की खुली दुनिया में कई तरह के बीज मिलते हैं .एबीवीपी की (इस साल मेम्बरशिप का इतने लाख का लक्ष्य है के तहत भीड़ वाली) मेंबर बन गयी एक बैठक अटेंड की रास नहीं आई..तब तक भीतर मार्क्सवाद के बीज जड़ पकड़ने लगे..धीरे धीरे इन अद्रश्य व मिथकीय देवी देवताओं के बजाय दुनिया व उसके वाशिंदों के प्रति आस्था जगने लगी.तब से आज तक कोइ उपवास नहीं रखा..मिथ्या कही जाने वाली यह दुनिया को ही तब से सत्य मानती रही हूँ.इसीलिए खुद को आस्तिक मानती हूँ..नास्तिक उसे जो जीती जागती दुनिया को मिथ्या कहता है..अब माँ दुर्गा को पूजती नहीं अन्वेषण करती हूँ उनका की क्यूँकर उन्हें दुर्गा से काली होना पड़ा..किन परिस्तिथियों ने उन्हें इतना सर्वशक्तिमान बनाया...इसीलिए सेल्यूट हमारी इस पूर्वज लीडर को...

arun arora on facebook

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बीजिंग। चीन की एक गर्भवती महिला को अधिकारियों ने उसके घर से खींच कर निकाला, अस्पताल ले गए और गर्भपात का इंजेक्शन लगवा दिया। महिला का पति हक्का-बक्का सा देखता रह गया। महिला एक बच्चे की मां थी, और छह माह की गर्भवती थी। यह सब हुआ देश की सख्त एक संतान नीति के कारण।

लिऊ शिनवेन नामक इस 33 साल की महिला ने बताया कि शानडोंग स्थित उनके घर में 24 अधिकारी आए। सुबह 4 बजे वे मुख्य द्वार तोड़ कर भीतर घुसे और उसे बिस्तर से खींच कर ले गए। अस्पताल में गर्भपात संबंधी कागजों पर जबरन उसके दस्तखत करवाए।

लाऊ के पति झाऊ गुओकिआंग ने बताया कि उसे पकड़कर सोफे पर बिठा दिया गया। वह वहीं से लाचार अपनी पत्नी को ले जाते देखता रहा। पांच घंटे तक उसे बिठाए रखा गया। उसे नहीं बताया कि उसकी पत्नी को कहां ले जा रहे हैं। बाद में वह पत्नी को ढूंढ़ते हुए वेफांग शहर के फांगजी जिला अस्पताल पहुंचा जहां उसकी पत्नी मिली, लेकिन तब तक उसे गर्भपात का इंजेक्शन लगाया जा चुका था।

सोमवार, 5 अगस्त 2013

sangeeta singh tomar on facebook

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जरुर शेयर कीजिये!!
वृन्दावन के एक महान संत श्री हनुमान
दास जी,
आयु 170 वर्ष से अधिक .....
आप खुद देखे....
ये है संसार के सबसे अधिक आयु के
व्यक्ति पर भारत सरकार को घोटालो से
फुर्सत हो तो देश पर ध्यान देगी,
चाइना वाले अपने 115 या 120 साल उम्र
के टुच्चे से लोगो को सबसे अधिक आयु के
व्यक्ति बता देती है,
श्री हनुमान दास जी ने समाज कल्याण के
लिए बहुत से कार्य किये , गोशालाए
भी शुरू करवाई , जिनमे १००० से अधिक
गायो की सेवा की जाती है |


Photo: जरुर शेयर कीजिये!!
वृन्दावन के एक महान संत श्री हनुमान
दास जी,
आयु 170 वर्ष से अधिक .....
आप खुद देखे....
ये है संसार के सबसे अधिक आयु के
व्यक्ति पर भारत सरकार को घोटालो से
फुर्सत हो तो देश पर ध्यान देगी,
चाइना वाले अपने 115 या 120 साल उम्र
के टुच्चे से लोगो को सबसे अधिक आयु के
व्यक्ति बता देती है,
श्री हनुमान दास जी ने समाज कल्याण के
लिए बहुत से कार्य किये , गोशालाए
भी शुरू करवाई , जिनमे १००० से अधिक
गायो की सेवा की जाती है |

 http://noticiasvaishnavasemportugues.blogspot.in/2013/05/hanuman-das-baba-cerca-de-180-anos.html?m=1

 http://raganugabhaktibabajis.blogspot.in/?m=1

रविवार, 4 अगस्त 2013

कमजोरियां मत ढूंढ मुझ में तू दोस्त मेरे: Ravi sharma on facebook

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कमजोरियां मत ढूंढ मुझ में तू दोस्त मेरे
एक तू भी शामिल है मेरी कमजोरियों में...!!

अनन्या स्वास्तिका : मेरे सभी मित्रों को " मैत्री दिवस की शुभकामनाये"

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मैत्री को आध्यात्मिक मूल्य सर्वप्रथम गौतम बुद्ध ने दिया.
और मैत्री को समर्पित हैं उनकी जातक कथाये जिसमे उन्होंने अपने पूर्वजन्मो की कथाओं के माध्यम से मैत्री के सर्वोच्च मूल्य को निरूपित किया है.
अपने भावी अवतरण को उन्होंने " मैत्रेय" नाम दिया है.
जो अभी तक सार्थक न हो सका.
तीन कोशिशो और थियोसोफी के विश्वव्यापी आंदोलनों के बावजूद भी.
एक बार नित्यानंद ( कृष्णमूर्ति के ज्येष्ठ भ्राता) में बुद्ध के अवतरण का प्रयास हुआ और इन्ही प्रयासों में उनकी मृत्यु हुई. थियोसोफी पर मुकदमा चला.
दूसरी बार कृष्णमूर्ति पर - लेकिन कृष्णमूर्ति ने बुद्ध को स्वीकार नही किया.
तीसरी बार ओशो पर- जिसके बाद ही ओशो ने जोरबा द बुद्धा की घोषणा की.
बुद्ध की चेतना ओशो की देह में ३ दिन से कम समय तक रही.
जिसके एक मात्र साक्षी गोविन्द सिद्धार्थ रहे.
और "करवट" को लेकर बात नही बनी- ओशो कभी समझौतावादी नही रहे.
बुद्ध बाए करवट सोते थे और ओशो दाए- या शायद इसका उलटा.
यह तो कहने की बाते हैं- संभवतः बुद्ध ओशो के मात्र एक आयाम को ही व्यक्त करते थे.
अतः बुद्ध को ससम्मान ओशो ने विदा दे दिया.
मैत्री का मूल्य प्रेम से बढ़ कर है.
मैत्री का गुण हमे मैत्रेय तह अग्रसर कर सकता है-
फिर बुद्ध का अवतरण अनायास होगा.
बुद्धत्व के रूप में !
इसी कामना के साथ-
मेरे सभी मित्रों को " मैत्री दिवस की शुभकामनाये"
_______________________
अनन्या स्वास्तिका
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shikha.varshney on facebook

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गोवा - पश्चिमी देशों से भारत में वाकई एक "गेट वे" की तरह है. दो एकदम अलग संस्कृति का खूबसूरत संगम। गोवा में जिस तरह पश्चिम ,पूर्व से घुल मिल जाता है वह देखने लायक है. एक अलग संस्कृति की प्रमुखता होते हुए भी गोवा में भारत की छाप भी साफ़ दिखाई देती है. पूरे भारत से अलग एकदम नए तरह के नारंगी, गुलाबी, बैगनी, हरे रंगों से पुते रंग विरंगे घर, उनके आँगन में लगे हुए क्रोस चिन्ह, खान पान और पहनावे में पुर्तगाली प्रभाव,इसके वावजूद, जो मुझे सबसे अच्छा लगा वह यह कि, लोग हिंदी बोलते हुए हिचकिचाते नहीं. जैसी भी आती है गर्व से से बोलते हैं.
कुल मिलाकर एक बेहद खुशनुमा अनुभव रहा ४ दिन का गोवा प्रवास। बाकी बातें बाद में फिलहाल कुछ तस्वीरें. 
 — Mumbai,Goa 2013 (5 photos)

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