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सोमवार, 5 अगस्त 2013

sangeeta singh tomar on facebook

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जरुर शेयर कीजिये!!
वृन्दावन के एक महान संत श्री हनुमान
दास जी,
आयु 170 वर्ष से अधिक .....
आप खुद देखे....
ये है संसार के सबसे अधिक आयु के
व्यक्ति पर भारत सरकार को घोटालो से
फुर्सत हो तो देश पर ध्यान देगी,
चाइना वाले अपने 115 या 120 साल उम्र
के टुच्चे से लोगो को सबसे अधिक आयु के
व्यक्ति बता देती है,
श्री हनुमान दास जी ने समाज कल्याण के
लिए बहुत से कार्य किये , गोशालाए
भी शुरू करवाई , जिनमे १००० से अधिक
गायो की सेवा की जाती है |


Photo: जरुर शेयर कीजिये!!
वृन्दावन के एक महान संत श्री हनुमान
दास जी,
आयु 170 वर्ष से अधिक .....
आप खुद देखे....
ये है संसार के सबसे अधिक आयु के
व्यक्ति पर भारत सरकार को घोटालो से
फुर्सत हो तो देश पर ध्यान देगी,
चाइना वाले अपने 115 या 120 साल उम्र
के टुच्चे से लोगो को सबसे अधिक आयु के
व्यक्ति बता देती है,
श्री हनुमान दास जी ने समाज कल्याण के
लिए बहुत से कार्य किये , गोशालाए
भी शुरू करवाई , जिनमे १००० से अधिक
गायो की सेवा की जाती है |

 http://noticiasvaishnavasemportugues.blogspot.in/2013/05/hanuman-das-baba-cerca-de-180-anos.html?m=1

 http://raganugabhaktibabajis.blogspot.in/?m=1

रविवार, 4 अगस्त 2013

कमजोरियां मत ढूंढ मुझ में तू दोस्त मेरे: Ravi sharma on facebook

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कमजोरियां मत ढूंढ मुझ में तू दोस्त मेरे
एक तू भी शामिल है मेरी कमजोरियों में...!!

अनन्या स्वास्तिका : मेरे सभी मित्रों को " मैत्री दिवस की शुभकामनाये"

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मैत्री को आध्यात्मिक मूल्य सर्वप्रथम गौतम बुद्ध ने दिया.
और मैत्री को समर्पित हैं उनकी जातक कथाये जिसमे उन्होंने अपने पूर्वजन्मो की कथाओं के माध्यम से मैत्री के सर्वोच्च मूल्य को निरूपित किया है.
अपने भावी अवतरण को उन्होंने " मैत्रेय" नाम दिया है.
जो अभी तक सार्थक न हो सका.
तीन कोशिशो और थियोसोफी के विश्वव्यापी आंदोलनों के बावजूद भी.
एक बार नित्यानंद ( कृष्णमूर्ति के ज्येष्ठ भ्राता) में बुद्ध के अवतरण का प्रयास हुआ और इन्ही प्रयासों में उनकी मृत्यु हुई. थियोसोफी पर मुकदमा चला.
दूसरी बार कृष्णमूर्ति पर - लेकिन कृष्णमूर्ति ने बुद्ध को स्वीकार नही किया.
तीसरी बार ओशो पर- जिसके बाद ही ओशो ने जोरबा द बुद्धा की घोषणा की.
बुद्ध की चेतना ओशो की देह में ३ दिन से कम समय तक रही.
जिसके एक मात्र साक्षी गोविन्द सिद्धार्थ रहे.
और "करवट" को लेकर बात नही बनी- ओशो कभी समझौतावादी नही रहे.
बुद्ध बाए करवट सोते थे और ओशो दाए- या शायद इसका उलटा.
यह तो कहने की बाते हैं- संभवतः बुद्ध ओशो के मात्र एक आयाम को ही व्यक्त करते थे.
अतः बुद्ध को ससम्मान ओशो ने विदा दे दिया.
मैत्री का मूल्य प्रेम से बढ़ कर है.
मैत्री का गुण हमे मैत्रेय तह अग्रसर कर सकता है-
फिर बुद्ध का अवतरण अनायास होगा.
बुद्धत्व के रूप में !
इसी कामना के साथ-
मेरे सभी मित्रों को " मैत्री दिवस की शुभकामनाये"
_______________________
अनन्या स्वास्तिका
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गोवा - पश्चिमी देशों से भारत में वाकई एक "गेट वे" की तरह है. दो एकदम अलग संस्कृति का खूबसूरत संगम। गोवा में जिस तरह पश्चिम ,पूर्व से घुल मिल जाता है वह देखने लायक है. एक अलग संस्कृति की प्रमुखता होते हुए भी गोवा में भारत की छाप भी साफ़ दिखाई देती है. पूरे भारत से अलग एकदम नए तरह के नारंगी, गुलाबी, बैगनी, हरे रंगों से पुते रंग विरंगे घर, उनके आँगन में लगे हुए क्रोस चिन्ह, खान पान और पहनावे में पुर्तगाली प्रभाव,इसके वावजूद, जो मुझे सबसे अच्छा लगा वह यह कि, लोग हिंदी बोलते हुए हिचकिचाते नहीं. जैसी भी आती है गर्व से से बोलते हैं.
कुल मिलाकर एक बेहद खुशनुमा अनुभव रहा ४ दिन का गोवा प्रवास। बाकी बातें बाद में फिलहाल कुछ तस्वीरें. 
 — Mumbai,Goa 2013 (5 photos)

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